दोनो पार्टियों ने कहा है कि NRI को वोट मांगने से रोका जाए, क्योंकि वे ‘बाहरी’ लोग हैं, और उनका आरोप है कि इन अप्रवासी भारतीयों का ‘रिश्ता कट्टरपंथी ताकतों से है

बठिंडा : पंजाब चुनाव में आम आदमी पार्टी का प्रचार करने आए एनआरआई की फ़ौज ने अकाली-बीजेपी और कांग्रेस की नाम में दम कर रखा है. विदेश से आए इन अप्रवासीयो में से किसी ने नौकरी छोड़ी है तो कोई दो-तीन महीने की छुट्टी लेकर प्रचार के लिए आया है.

लगातार रोचक होते जा रहे पंजाब विधानसभा चुनाव में अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, इटली और सिंगापुर के हजारों एनआई पिछले कई दिनों से पंजाब के गांव और गलियों में धूल छान रहे हैं. ‘चलो पंजाब ऐप’ के मुताबिक कुछ दिनों पहले तक 35 हजार लोगों ने पंजाब आने के लिए रजिस्ट्रेशन किया था. 117 विधानसभा सीटों वाले पंजाब प्रदेश की 34-40 सीटों में इन NRI प्रभाव बताया जा रहा है.

अकाली-भाजपाईयों व कांग्रेस ने चुनाव आयोग से NRI को रोकने की अपील की है

Nri support AAP Punjab

‘आप’ के लिए प्रचार कर रहे एनआरआई की अकालियों तथा कांग्रेस ने चुनाव आयोग में शिकायत की है. दोनो पार्टियों ने कहा है कि एनआरआई को वोट मांगने से रोका जाए, क्योंकि वे ‘बाहरी’ लोग हैं, और उनका आरोप है कि इन अप्रवासी भारतीयों का ‘रिश्ता कट्टरपंथी ताकतों से’ है, जिसकी वजह से प्रांत में अशांति फैल सकती है. अकालियों के इस आरोप के बाद एनआरआई भी गुस्से में हैं. वो कहते है कि, “अकाली सरकार हमारे बारे में शिकायत क्यों कर रही है…? हम तो अपने परिवार के लिए सिर्फ बेहतर ज़िन्दगी चाहते हैं…”

आप ने एनआरआई के बदौलत ही 2014 मे जीती थी 4 सीट

 

भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान से उपजी ‘आप’ ने एनआरआई की बदौलत मोदी की सभी प्रदेशों में प्रचंड लहर के बावजूद 2014 के आम लोकसभा चुनाव में 4 सीटें हासिल की थी. इस बार भी उन्हें विदेशों से आर्थिक और वालेंटियर के रुप में भारी मदद मिली है. आम आदमी पार्टी में बाकायदा विदेशी शाखाएं और उनके प्रबंधक हैं. कुमार विश्वास इनके प्रभारी हैं.

अकाली-बीजेपी व कांग्रेस भी आप की राह पर

अप्रवासी भारतीयों का समर्थन आम आदमी पार्टी के अलावा अब कांग्रेस और अकालियों ने भी जुटाना शुरू कर दिया है. पंजाब प्रदेश कांग्रेस के मुताबिक पिछले दिनों ही 300-400 एनआरआई कांग्रेस के प्रचार के लिए पंजाब पहुंचे है. ये अपने गांव और क्षेत्र में परिचितों के बीच पंजाब को सुधारने के नाम पर अभियान चला रहे हैं.

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Author: Harlal

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