उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी में कलह रुकने का नाम ही ले रहा, यहा दाव-पेच बाप-बेटा और चाचा के बीच चल रही हैं

समाजवादी पार्टी के मोजूदा चुनाव चिह्न साइकिल पर अपना दावा करने के लिए आज मंगलवार को चुनाव आयोग में अखिलेश यादव के गुट ने पहुंच कर कहा कि उनके पास 90 फीसदी विधायकों का साथ है। सभी अखिलेश यादव का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में अखिलेश के नेतृत्व  वाले धड़े को ही सपा समझा जाना चाहिए।

अखिलेश खेमे की ओर से रामगोपाल यादव, नरेश अग्रवाल और किरणमय नंदा चुनाव आयोग गए थे।

दिल्ली में चुनाव आयोग के अधिकारियों से लगभग 20 मिनट की मुलाकात के बाद रामगोपाल यादव ने इस बात की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में चुनाव आयोग को एक ज्ञापन भी सौंपा है, जिसमें कहा गया है कि अखिलेश यादव गुट ही असली समाजवादी पार्टी है और पूरी सपा पार्टी अखिलेश यादव के साथ है इसलिए पार्टी नाम और चुनाव चिह्न ‘साइकिल’ उन्हें ही आवंटित किया जाना चाहिए।

इस बीच खबर है कि मुलायम सिंह यादव भी दिल्ली से लखनऊ पहुंचे। इससे पहले मुलायम ने सपा पार्टी के चुनाव चिह्न ‘साइकिल’ पर अपनी दावेदारी जताते हुए सोमवार को चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटा चुकी हैं।

इससे पहले मुलायम सिंह ने सोमवार को दिल्ली में अपने आवास पर अमर सिंह, शिवपाल यादव के साथ लंबी बैठक की। इसके बाद सभी एक साथ चुनाव आयोग गए। चुनाव आयुक्त से मुलाकात के वक्त इन तीनों के साथ जयाप्रदा भी मौजूद थीं।

ऐसा भी सुना जा रहा हैं कि अगर साइकिल चुनाव चिह्न पर कोई पेंच फंसता है तो अखिलेश खेमा मोटरसाइकिल को चुनाव चिह्न के तौर पर लेने का विचार कर सकता है। 
चुनाव आयुक्त से करीब चालीस मिनट की मुलाकात के बाद मुलायम और शिवपाल बिना कुछ बोले घर के लिए निकल गए। और मुलायम सिंह ने 5 जनवरी को बुलाए गए राष्ट्रीय अधिवेशन को रद्द कर दिया।

रामगोपाल यादव ने ‘साइकिल’ पर दावा जताने के लिए सोमवार को चुनाव आयोग से मुलाकात का वक्त मांगा था। आयोग ने उन्हें मंगलवार सुबह 11:30 बजे का वक्त दिया था, जिसमें पहले तो रामगोपाल ने कहा था कि वे चुनाव आयोग नहीं जाएंगे। बाद में मुलायम सिंह के आयोग जाने के बाद उन्होंने भी चुनाव आयोग जाना ऊचित समझकर, आयोग जाने का फैसला किया।

इस प्रकार की आपसी लडाई में उत्तर प्रदेश का विकास रुक सा गया हैं,युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल में अच्छा नाम कमाया हैं जनहित के कार्यो को बढावा दिया हैं

Author: Harlal

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