जयपुर। नोटबंदी की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से 50 दिन का समय मांगा था और कहा था की आप मुझे 50 दिन का समय दे ताकि समस्या से निजात मिल सके, जिस पर देशवासियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हर तरह से साथ भी दिया। वहीं 50 दिन बीत जाने के बाद इंडिया तो प्रधानमंत्री के साथ आगे बढ़ गया लेकिन, भारत उतनी तेजी से नहीं बढ़ सका। कहा जाता हैं कि असली भारत गांवों में बसता है लेकिन, नोटबंदी के इस सफर में शायद जाने-अनजाने ही सही वो भारत कहीं दरकिनार हो गया।

यदि एकत्रित आंकड़ों पर नजर डालें तो हालात कुछ ऐसे सामने आते हैं कि ग्रामीण इलाके में इस नोटबंदी में नोटों की कमी से आम नागरिक खासे परेशान रहे। राजस्थान प्रदेश में कुल मिलाकर 2 हजार से ज्यादा ग्रामीण बैंकों की शाखएं  हैं जिनमें डेढ़ करोड़ से अधिक खाताधारक हैं। आरबीआई ने प्रदेश को नोटबंदी के बाद करीबन 20 हजार करोड़ रुपये दिये हैं लेकिन ग्रामीण बैकों को इसमें से केवल 1000 करोड़ ही दिये गये हैं।

प्रदेश में ग्रामीण बैंकों की संख्या:

  1. प्रदेश में करीबन 2 हज़ार से अधिक ग्रामीण बैंकों की शाखाएं है। (अल्ट्रा स्मॉल ब्रांच मिलाकर)
  2. इनमें डेढ़ करोड़ से ज्यादा खाताधारक ग्राहक है।
  3. 6 लाख किसान क्रेडिट कार्ड बैंकों ने जारी किए है।
  4. इन बैंकों में हैं 45 लाख जनधन खाते।
  5. 39 लाख रुपए कार्ड (एटीएम कार्ड) जारी किए हैं।
  6. 36 हज़ार करोड़ का इन बैंकों का बिजनेस है।

आरबीआई ने प्रदेश में दी करीब 20 हज़ार करोड़ की नई करंसी:

  1. ग्रामीण बैंकों को मिले मात्र 1000 करोड़।
  2. यानि कुल करेंसी का मात्र 5 प्रतिशत।
  3. ऐसे में एक ग्रामीण के हिस्से आया 667 रुपए कुछ पैसा।
  4. यानि प्रति अकांउट करीब 667 रुपये का ये आंकड़ा बैठता है।
    इन आंकड़ों से ये समझना आसान है कि ग्रामीण बैंक इस नोटबंदी में​ किस तरह से प्रभावित रहा है।

8 हजार करोड़ पुराने नोट वापस आए
इस नोटबंदी में ग्रामीण बैकों में भले ही नयी करंसी पर्याप्त मात्रा में नहीं आई लेकिन करीब 8 हजार करोड़ रुपये के पुराने नोट वापस आए हैं। ऐसे मे ग्रामीण जनजीवन इस नोटबंदी से सबसे ज्यादा प्रभावित है।

वित्त मंत्रालय से की शिकायत
इस मामले में ऑल इंडिया ग्रामीण बैंक ऑफिसर्स ऑर्गेनाइजेशन के पदाधिकारियों ने वित्त मंत्रालय व पीएमओ को भी शिकायत की है। इनका कहना है कि ग्रामीण बैंकों की कोई चेस्ट नहीं है। ऐसे में इन बैंकों को पूरी तरह से अन्य बैंकों की चेस्ट ब्रांच पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन यह चेस्ट ब्रांच अपनी ब्रांचों को ज्यादा करंसी दे रहे हैं। जिसके चलते ग्रामीणों तक नई करेंसी बहुत कम पहुंची।

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ग्रामीणों बैंकों को आरबीआई से मिल रही करेंसी
इस शिकायत के बाद अब ग्रामीण बैंक को सीधे आरबीआई से करेंसी मिलने लगी है। लेकिन यह भी ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। ऐसे में ऑर्गेनाइजेशन ने सरकार से मांग की है कि नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने के साथ ही ऐसी कोई व्यवस्था की जाए जिससे ग्रामीण बैंकों को भी पूरा पैसा मिले।

Author: Harlal

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