Sikar:

भारतीय किसान

सन 1970 से पहले जब सिंचाई के लिए बिजली का उपयोग नहीं होता था तब किसान वर्षा ऋतु में वर्षा जल से खेती करके 5 हेक्टर जमीन में मुश्किल से ₹200 सालाना की आमदनी प्राप्त करता था।1970 के दशक के बाद जब खेती के लिए विद्युत आपूर्ति शुरु की गई तो किसानों ने भूजल से गेहूं ,सरसो,चना,मूंगफली, जौ जैसी फसलों का उत्पादन शुरू कर दिया। इससे उसकी अनाज की पैदावार कोई 10 गुना बढ़ गई तथा 5 हेक्टर जमीन में उस समय की कीमतों के हिसाब से उसकी आमदनी लगभग ₹30000 प्रति वर्ष हो गई। इससे उसने पक्के मकान बनाए तथा अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चालू कर दिया। पर जो हमने फसलों का चयन किया वह भूजल द्वारा उत्पादन करने के लिए बिल्कुल अनुपयुक्त था। इन फसलों के लिए भूजल का अत्यधिक दोहन किया गया। आज 93 प्रतिशत भूजल इन फसलों को पैदा करने में प्रयोग हो रहा है जबकि 6% जल का उपयोग पीने के लिए किया जा रहा है तथा 1% जल का उपयोग अन्य कामों के लिए किया जा रहा है। इस सब का नतीजा यह हुआ है की भूजल खत्म होने के कगार पर है। अभी हमें सावचेत होकर भूजल से इन फसलों का पैदा करना बंद करके फलदार पौधों को उत्पादन करना चाहिए। इससे न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ेगी बल्कि भू जल का संरक्षण भी होगा। हमें किसी भी तरह से अब जो भूजल का उपयोग किया जा रहा है उसका सिर्फ 10% उपयोग करके बागवानी करनी चाहिए। इससे किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी। गेहूं,चना ,सरसों तथा मूंगफली का उत्पादन सिर्फ नहरी पानी से किया जाना चाहिए। वहां भी जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए खालो तथा क्यारियों की बजाए फवारो द्वारा सिंचाई करके फसल पैदा करनी चाहिए जिससे पानी की लागत आधी से भी कम रह जाएगी। इस तरह से जो नहरी जल बचेगा उससे और ज्यादा क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी। इससे फसल का उत्पादन भी बढ़ेगा तथा और ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा।

यदि हमें किसानों को खुशहाल करना है –

तो हमें उच्च तकनीक का उपयोग करके इस तरह से खेती करनी चाहिए कि हमारे देश को जितने अनाज, फल तथा सब्जियों की जरूरत है वह सिर्फ 15% आबादी ही करे तथा शेष लोग उद्योग-धंधों या सर्विस सेक्टर में आ जाएं। यह होने पर ही हमारा किसान खुशहाल हो सकेगा। हमें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगाने पर ध्यान देना चाहिए जिससे जो सब्जियां तथा फल पैदा होते हैं उनका प्रसंस्करण कर मूल्यवृद्धि की जा सके। इससेे फसलों की बर्बादी भी घटेगी तथा किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी तथा हम हमारे उत्पादन का पूरी दुनिया में निर्यात करके अच्छी कीमत भी वसूल कर सकेंगे।

उपरोक्त विचार श्री चिरंजी लाल महरिया के हैं | चिरंजी लाल महरिया ने बिट्स पिलानी से अभियांत्रिकी डिग्री लेने के बाद खुद का व्यवसाय करने के साथ-साथ खेती में विशेष रूचि रखते हैं |

Author: indianswaraj