अलवरडिजीटलइंडिया और स्मार्ट सिटी का सपना हम जरूर देख रहे हैं, लेकिन प्रदेश की जमीनी सच्चाई इससे कहीं जुदा है। सुनने में यह अजीब सा लगता है, लेकिन यह कड़वा सच है कि अलवर जिले के 512 राजस्व ग्राम पंचायतों में से 267 ग्राम पंचायतों की डगर तक आजादी के 70 साल बाद भी सरकारी परिवहन सेवा नहीं पहुंच सकी है।

जिले की लाखों की आबादी आज भी अपने रोजमर्रा की यात्रा जान जोखिम में डालकर या मनमाने दाम चुका कर तय करता है। इस कड़वी सच्चाई को यहां के जनप्रतिनिधियों ने कई बार विधानसभा सहित अन्य पटलों पर रखा है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।

इन ग्राम पंचायतों में रहने वाले लोग आज भी जुगाड़, सहित निजी संसाधनों के भरोसे चल रहे हैं। जिले की कुल अबादी करीब 36 लाख से अधिक है, ऐसे में जिले की लाखों की आबादी सरकारी परिवहन सेवा की आस सालों से लगाए बैठी है। लेकिन, हर बार केवल आश्वासन तक ही सीमित रह जाते हैं।

सरकारी दावे जमीन पर खोखले….

इन ग्राम पंचायतों के लोग गांव से शहर तक अब भी पैदल-पैदल व अपने साधनों से दौड़ लगा रहे हैं। डग्गेमार वाहनों में जिन्दगी दांव पर लगाकर ग्रामीणों को यात्रा करनी पड़ती है। दरअसल, डग्गेमार वाहनों में यात्रा से आए दिन हादसे होते हैं। गत दिनों एमआईए थाना क्षेत्र में एक निजी बस के पलट जाने से एक स्कूली छात्र की मौत हो गई। इससे पूर्व भी जिले में डग्गेमार वाहनों में यात्रा से कई हादसे हो चुके हैं।

ब्लॉकवार ग्राम पंचायतें वंचित…

अलवर जिले में 512 ग्राम पंचायतों में से वर्तमान में 267 ग्राम पंचायतें परिवहन सेवा से वंचित हैं। इनमें रामगढ़ की 43, लक्ष्मणगढ़ की 40, बहरोड़ की 28, नीमराणा की 33, बानसूर की 24, किशनगढ़बास की 34, कोटकासिम की 24, मुण्डावर की 41 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।

सेवा से ज्यादा कमाई पर जोर….

रोडवेज को सरकार के स्तर पर भले ही सेवा के रूप में माना जाता हो, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात केवल कमाई तक सीमित है। जिन मार्गों पर रोडवेज को पर्याप्त यात्री भार नहीं मिलता, उनसे कुछ दिनों बाद बसें हटा ली जाती हैं।

प्रबंधन ने भी रोडवेज अधिकारियों को जिन मार्गों पर 15 रुपए प्रति किलोमीटर से कम का राजस्व मिल रहा है, उन रूटों से बसों को हटाने के निर्देश दे रखे हैं। इसका परिणाम यह है कि सरकार की इस योजना से ज्यादातर ग्रामीण वंचित हैं। वहीं, दूसरी ओर कमाई के मार्गों पर बसों की भरमार बनी हुई है।

विधानसभा में भी उठा चुका हैं मामला….

अलवर जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत तक रोडवेज बस चलाने का मुद्दा कई बार जिले के विधायकों ने विधानसभा में भी उठाया, लेकिन उनकी मांग पर ना सरकार ने ध्यान दिया और ना रोडवेज प्रशासन ने। बल्कि जो बसें पहले गांव तक जाती थी, उनमें से कई बसों का रूट बदल दिया गया।

ज्ञानदेव आहूजा विधायक रामगढ़ ने बताया कि  यह ग्रामीण जनता के साथ धोखा है। मैने कई बार यह मुद्दा विधानसभा में उठाया। यह सही है कि सबसे ज्यादा ग्राम पंचायतें मेरे क्षेत्र में रोडवेज सेवा से वंचित हैं। रोडवेज घाटे का रोना रो रहा है। मामले से मुख्यमंत्री को अवगत करा प्रत्येक ग्राम पंचायत तक बस सेवा शुरू कराने के प्रयास किए जाएंगे।

रमेशचंद शर्मा मुख्य प्रबंधक रोडवेज अलवर ने बताया कि रोडवेज सेवा से ग्राम पंचायतों के वंचित होने के कई कारण है। कई बार ग्राम पंचायत इंटीरियर में होती है। कई बार आशानुरूप यात्रीभार नहीं मिलता। प्रबंधन ने भी 15 रुपए प्रति किलोमीटर से कम आय वाले रूटों पर बसें नहीं चलाने के आदेश दिए हुए हैं।

Author: Harlal

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